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नेपाल के पूर्व सांसद मंगल प्रसाद गुप्ता नहीं रहे

बढ़नी (सिद्धार्थनगर)। नेपाल के कपिलवस्तु क्षेत्र नंबर 3 के पूर्व सांसद व हिंदी मंच नेपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंगल प्रसाद गुप्ता का रविवार को तड़के सुबह करीब 5 बजे उपचार के दौरान मेदान्ता अस्पताल, गुरुग्राम (हरियाणा) में हृदय घात से निधन हो गया। वे  81 वर्ष के थे।

उनके निधन पर राजनीतिक, सामाजिक तथा विभिन्न पेशागत क्षेत्र के व्यक्तियों ने गहरा दुःख व्यक्त किया है।

मंगल प्रसाद गुप्ता अपने पीछे चार बेटे विवेक गुप्ता ,विनय गुप्ता, विनीत गुप्ता , विशाल गुप्ता और दो पुत्रियां नीलम गुप्ता और पूनम गुप्ता छोड़ गए हैं। दोनो बहने बड़ी है और चारों भाई , बहनो से छोटे हैं। चारों बेटे अमेरिका में रहते हैं।  इलाज के दौरान अंतिम दिनों में उनका परिवार और उनके पुत्र और पुत्रियां साथ थे। सभी बेटे बारी बारी अमेरिका से आते थे और उनकी देखभाल और सेवा करते थे।

उनकी बेटी नीलम गुप्ता ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर को 9 जून को उनके निवास स्थान कृष्णा नगर , वार्ड नंबर दो , नेपाल में उनके अंतिम दर्शन एवं श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु रखा जायेगा। तत्पश्चात, उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप 10 जून को  अयोध्या धाम में उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा।

मंगल प्रसाद गुप्ता करीब पचास साल से नेपाल की सियासत में सक्रिय थे। राजतंत्र में वो कैबिनेट मंत्री भी रहे। उनके भारत के शीर्ष नेताओं से भी मधुर सबंध थे। वो एक जुझारू ,कर्मठ और अध्यनशील राजनेता के रूप में जाने जाते थे। वो एक उच्च शिक्षित राजनेता थे। उन्होंने श्री लंका से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की थी। उन्होंने नेपाली कांग्रेस से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की थी। बाद में वो मधेश आधारित पार्टियों आदि से भी जुड़े रहे । आखिरी दिनों में नेकपा एमाले से सांसद निर्वाचित हुए थे। कपिलवस्तु क्षेत्र के लोकप्रिय नेता के रूप में पहचाने जाने वाले मंगल प्रसाद गुप्ता ने अपने राजनीतिक जीवन में जनता की सेवा, विकास और सामाजिक सद्भाव को सदैव प्राथमिकता दी।

मंगल प्रसाद गुप्ता ने किसानों को उनका हक दिलाने के लिए मोही आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सामंती व्यवस्था के दौरान, जो किसान बड़े जमींदारों की जमीन पर बंटाई या किराए पर खेती करते थे, उन्हें ‘मोही’ कहा जाता था। नेपाल में भूमि सुधार कानूनों के तहत मोही किसानों को जमीन पर कानूनी अधिकार दिलाने के लिए कई दशकों तक आंदोलन और संघर्ष हुए थे। उस आंदोलन में मंगल प्रसाद गुप्ता ने बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐतिहासिक रूप से, मोही आंदोलन का मुख्य लक्ष्य शोषित और भूमिहीन किसानों को जमींदारों द्वारा मनमाने ढंग से बेदखल होने से बचाना और जोतने वाली जमीन पर उनका स्थायी मालिकाना हक सुनिश्चित करना था।

मंगल प्रसाद गुप्ता ने अपने सार्वजनिक जीवन में क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आधारभूत संरचना के विस्तार के साथ साथ हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए भी समर्पित रहे। वो हिंदी मंच नेपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। दुनिया भर में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए होने वाले आयोजनों में वो शिरकत करते थे। कोरोना काल से पूर्व उन्होंने नेपाल की राजधानी काठमांडू में हिंदी दिवस के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का भव्य् आयोजन किया था। जिसमें दुनिया भर से करीब दो दर्जन से भी ज़्यादा प्रतिनिधियों ,हिंदी के कवियों ,साहित्यकारों, लेखकों ने अलग अलग देशों से हिस्सा लिया था। नेपाल के चार बार प्रधान मंत्री रहे लोकेन्द्र बहादुर चंद समेत पूर्व प्रधानमंत्री डा बाबू राम भट्टराई, समेत मरीशस की डा सरिता बुधू ने भी हिस्सा लिया था।

मंगल प्रसाद गुप्ता शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए भी समर्पित थे। उन्होंने श्री मंगल प्रसाद गुप्ता स्वंत्रता देवी गुप्ता आधारभुत विधालय की भी स्थापना अपने क्षेत्र में की है।