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हिंसा के दौर में बढ़ी गांधी के अहिंसात्मक सत्याग्रह की प्रासंगिकता – डॉ.मोहम्मद आरिफ

चौबेपुर (वाराणसी)।  सामाजिक संस्था ‘आशा ट्रस्ट’ द्वारा ग्राम भंदहा कला (कैथी) में संचालित आशा लाइब्रेरी में आयोजित दो दिवसीय समर कैंप का सोमवार को समापन हुआ। इस कैंप में अध्ययन केंद्र की 40 छात्राओं ने हिस्सा लिया और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के गुर सीखे।

दो दिनों तक चले इस शिविर में छात्राओं को रचनात्मकता से जोड़ने के लिए कई सत्र आयोजित किए गए। इसमें छात्राओं ने कविता और कहानी लेखन, कठपुतली संचालन, चित्रकला, पोस्टर और स्लोगन मेकिंग और गुलदस्ता (बुके) बनाना सीखा।

कैंप के दौरान आयोजित एक विशेष परिचर्चा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक और इतिहासकार डॉ. मोहम्मद आरिफ ने वैश्विक हालातों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि “आज जब पूरी दुनिया में हिंसात्मक युद्ध छिड़ा हुआ है, ऐसे समय में महात्मा गांधी के अहिंसात्मक सत्याग्रह की प्रासंगिकता और ज्यादा बढ़ जाती है। हमारी नई पीढ़ी को शहीद भगत सिंह, महात्मा गांधी, पं. जवाहरलाल नेहरू,मौलाना आजाद और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। युवाओं को इन मनीषियों के विचारों को अधिक से अधिक पढ़ने, जानने और समझने की कोशिश करनी चाहिए।”

 

संस्था के समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने सभी प्रतिभागी छात्राओं को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हम आपसी सहयोग और तालमेल से एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं। इन सीखी हुई अच्छी बातों को अपने जीवन में उतारकर ही हम समाज के एक जिम्मेदार और अच्छे नागरिक बन सकते हैं।

दो दिवसीय समर कैंप को सफल बनाने में दीन दयाल सिंह, सौरभ चन्द्र, प्रदीप सिंह, ब्रिजेश कुमार, मीनाक्षी दुबे, अमित कुमार, मिथिलेश दुबे, डॉ. इंदु पाण्डेय और वैभव पाण्डेय आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा।

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