चौरीचौरा। पूर्वांचल जर्नलिस्ट प्रेस क्लब उत्तर प्रदेश द्वारा रविवार को शहीद बंधू सिंह के पैतृक गांव डुमरी खास के एक मैरेज लान में आयोजित ‘ वर्तमान पत्रकारिता एवं चुनौतियां ‘ विषयक संगोष्ठी व प्रतिभा सम्मान समारोह को को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार व पूर्व राज्य सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही ने कहा कि सच को सामने लाना ही सच्ची पत्रकारिता है।
बतौर मुख्य वक्ता बोलते हुए श्री शाही ने कहा कि पत्रकारिता क्षेत्र में समय और अनुशासन के साथ गहरी पड़ताल व हर पक्षों से बात करते हुए सच्चाई उजाकर करना ही सच्ची पत्रकारिता है। उन्होंने कहानी के माध्यम कहते हुए कहा कि आज पत्रकारिता के पहरेदार को पालतू बनाने का काम किया गया है और उसे ही समाज के सामने परोसने का काम किया जा रहा है। समाज के पहरेदार बनते हुए समाज के आखिरी सीढ़ी तक के व्यक्ति तक जाकर सही बातों को समाज के सामने लाना ही सच्ची पत्रकारिता है। उन्होंने सलाह दिया कि बिना किसी लालच या दबाव के पत्रकारिता करते हैं तो जीवन में आप हमेशा सफल होंगे।
विशिष्ट वक्ता गोरखपुर जर्नलिस्ट एशोसिएशन के अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने कहा कि पत्रकारिता के बदलते हुए स्वरुप में पत्रकारिता करना एक कठिन काम है। हमारे पत्रकारिता के पुरोधाओं ने अपने खून से भी लिखकर खबरों का प्रकाशन किया है जो सच्चाई विश्वसनीयता से भरी थी। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल के दौर में मीडिया हाउसों के कारण पत्रकारों के हाथ बंधे हुए हैं। लेकिन उसी के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए पत्रकारिता धर्म का निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का पहला दायित्व सत्ता से प्रश्न करना होता है। पत्रकारिता में तेज होने से अधिक विश्वसनीय होना जरूरी है। पत्रकारिता की ताकत उसकी आवाज की ऊंचाई में नहीं बल्कि तत्वों की गहराई में होती है।

विशिष्ट वक्ता मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के अध्यक्ष अरविन्द राय ने कहा कि पत्रकार बनने के लिये नियमों का पालन करना होगा। सोशल मीडिया एक गंभीर चुनौती है, लेकिन चाहे कितनी भी वह प्रभावी हो जाय हजारों साल तक प्रिंट मीडिया का काम होगा। सोशल मीडिया केवल सूचनाएं दे सकती है, लेकिन सही खबरे प्रिंट मीडिया से ही मिल पाती है। सोशल मीडिया से तथ्य सामने नहीं आता है। उन्होंने यूटूबरो पर कहा कि नियमों और अनुशासन में रहकर अपनी पत्रकारिता करना चाहिए।
विशिष्ट वक्ता मनोज कुमार सिंह ने दुनिया और भारत में पत्रकारिता के इतिहास की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि भारत में पत्रकारिता की शुरुआत ही सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करने से हुआ, बदले में सरकार ने पत्रकारों का दमन किया। यह सिलसिला आज भी जारी है। सच्ची पत्रकारिता कर रहे संस्थानों और पत्रकारों का लगातार दमन हो रहा है। यही कारण है कि वर्ल्ड प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में 180 देशों में भारत 157 वें स्थान पर है। यह स्थिति इसलिए हुई है कि अखबारों , चैनलों और डिजिटल मीडिया समूहों पर कुछ पूंजीपतियों का नियंत्रण कायम हो गया है। ये पूंजीपति वही हैं जो सत्ताधारी दल को अकूत चन्दा दे रहे हैं और बदले में सरकार उन्हें देश के संसाधनों को सौंप रही हैं। उन्होंने कहा कि सबसे खतरनाक बात या है कि मीडिया बहुलांश सरकार के झूठ और नफरत की राजनीति का हिस्सा हो गया है।
विशिष्ट वक्ता डॉ. दिनेश मणि त्रिपाठी ने भी पत्रकारिता पर अपनी बात रखा और प्रेस क्लब के पहल की सराहना की।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रतिभा सम्मान समारोह का कार्यक्रम किया गया। जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में अपना नाम रोशन कर रहे प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया जिसमें महिला खिलाड़ी अर्पिता सरोज, अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी पुष्पा यादव, किक बॉक्सर मानसी निषाद, हाकी कोच रीता मिश्रा, ताइक्वांडो कोच गुलशेर सिंह गिल, क्रिकेटर इमरान अली, शाह आलम, एथलीट हरिओम यादव, धाविका स्नेहा यादव, सिद्धि, हरिओम जायसवाल, वंशिका यादव, कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे, शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. दिनेश मणि, डॉ. सतीश यादव, चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. ओमशिव मणि, डॉ. शाहनवाज, सर्प मित्र पंकज निषाद, अयूब अली, समूह में बेहतर प्रदर्शन करने वाली 20 से अधिक महिलाओं को भी समान्नित किया गया।
समाजसेवा के क्षेत्र में समाजसेवी एस के शर्मा, सरदार सुखदेव सिंह मजीठिया, अमित जायसवाल, प्रेस क्लब के कुशीनगर अध्यक्ष संदीप त्रिपाठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बृजेश मणि त्रिपाठी, वीरेश राय सहित अन्य पत्रकार सम्मानित किए गए।
कार्यक्रम अध्यक्षता कर रहे प्रदेश अध्यक्ष राज अनंत पांडेय ने सभी अतिथियों का आभार जताया और सम्मानित किया। संचालन प्रेस क्लब के महामंत्री दिलशाद आलम ने किया।
इस मौके पर ओपी गुप्ता, डॉ राम प्रताप विश्वकर्मा, प्रमोद जायसवाल, डॉ. अरविन्द कुमार, राजेश जायसवाल, दुर्गेश यादव, सर्वेश त्रिपाठी, अजीत यादव, दुर्गेश यादव, हरेन्द्र द्विवेदी, सतीश पांडेय, सुनील सिंह सहित प्रेस क्लब के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।
