लखनऊ। आइसा और आरवाईए ने ‘ GenZ Rising’ अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के आठ शहरों में जंतर-मंतर आंदोलन के चर्चित छात्र-युवा नेताओं की GEN-Z महाजुटान यात्रा की घोषणा की है। इसके तहत जंतर मंतर पर 23 दिन तक भूख हड़ताल करने वाली आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष के साथ-साथ जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति और सह सचिव दानिश आठ शहरों में जाकर छात्रों-युवाओं से संवाद करेंगे। यात्रा का मकसद उन सवालों और आंदोलनों तक पहुँचना है, जिन पर उत्तर प्रदेश के छात्र और नौजवान पहले से लड़ रहे हैं, और उन्हें एक व्यापक छात्र-युवा आंदोलन से जोड़ना है।
यह जानकारी यूपी प्रेस क्लब, लखनऊ में 18 अगस्त को आइसा के महासचिव कॉमरेड प्रसेनजित, आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार, आरवाईए के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य, आइसा के प्रदेश उपाध्यक्ष कामरेड विवेक, भानु और आइसा एक्टिविस्ट सीमा ने पत्रकार वार्ता में दी।

छात्र -युवा नेताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा स्थिति खुद बताती है कि ऐसी यात्रा की जरूरत क्यों है। लखनऊ में 12 जून को इको गार्डन में पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ छात्र जुटे। यही गुस्सा 25 जुलाई को प्रयागराज, लखनऊ, झांसी, सहारनपुर समेत कई जिलों में पेपर लीक, निष्पक्ष परीक्षा और जवाबदेही की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शनों के रूप में सामने आया।
लेकिन छात्रों का संकट सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है। लखनऊ में 31 जुलाई को फीस वृद्धि, छात्रसंघ चुनाव की बहाली और छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ विरोध हुआ। नौ अगस्त को अंबेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के SC/ST छात्रों ने इको गार्डन में प्रदर्शन कर इन कॉलेजों में लागू 70% SC/ST प्रवेश व्यवस्था को बचाने और उसे कानूनी सुरक्षा देने की मांग उठाई। केजीएमयू में 10 अगस्त को इंटर्न डॉक्टरों ने सम्मानजनक स्टाइपेंड के लिए प्रदर्शन किया। 11 अगस्त को 56 दिनों के संघर्ष के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन को 3 छात्रों का निष्कासन वापस लेना पड़ा और 14 तथा 17 अगस्त को लखनऊ में स्कूली छात्र भी शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़क पर उतरे।

ये अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं। ये इसी पीढ़ी के सामने खड़े एक बड़े संकट की अलग-अलग अभिव्यक्तियां हैं: सस्ती और सुलभ शिक्षा, सामाजिक न्याय, निष्पक्ष परीक्षा और भर्ती, रोजगार, सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों का सवाल।
जंतर-मंतर आंदोलन ने दिखाया कि जब ये बिखरे हुए सवाल एक साथ आते हैं, तो वे एक मजबूत राष्ट्रीय आवाज बन सकते हैं। GEN-Z महाजुटान यात्रा उसी प्रक्रिया को उत्तर प्रदेश में आगे बढ़ाने की कोशिश है। हर पड़ाव पर यात्रा छात्रों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों और चल रहे आंदोलनों से जुड़ेगी, उनके स्थानीय सवाल उठाएगी और उन्हें प्रदेश भर के छात्र-युवा सवालों से जोड़ेगी।
आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने बताया कि यात्रा 9 सितंबर को इलाहाबाद में महाजुटान से शुरू होगी। इसके बाद 10 सितंबर को रायबरेली, 12 सितंबर को बनारस, 13 सितंबर को आजमगढ़, 14 सितंबर को गोरखपुर, 15 सितंबर को फैजाबाद, 17 सितंबर को लखनऊ और 18 सितंबर को मेरठ में GEN -Z महाजुटान करते हुए पहुंचेगी।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा नेताओं के किसी शहर में जाकर भाषण देने की यात्रा नहीं है। यह उस शहर के छात्रों और नौजवानों के सवालों को प्रदेशव्यापी आंदोलन का हिस्सा बनाने की यात्रा है। हर जगह कोशिश होगी कि स्थानीय संघर्षों, मांगों और छात्र-युवा समूहों को शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों के व्यापक सवाल से जोड़ा जाए।
जंतर-मंतर किसी आंदोलन का अंत नहीं था। वह एक व्यापक छात्र-युवा उभार की शुरुआत थी, और GEN-Z महाजुटान यात्रा उसी को उत्तर प्रदेश में आगे बढ़ाने की कोशिश है।
