साहित्य - संस्कृति

अदनान कफ़ील दरवेश और राजेंद्र प्रसाद को  मिलेगा 2026 का ‘ केदारनाथ सिंह कविता सम्मान ’

नई दिल्ली/वाराणसी/लखनऊ। समकालीन भारतीय कविता के मूर्धन्य हस्ताक्षर स्वर्गीय केदारनाथ सिंह की स्मृति में साखी पत्रिका द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित ‘केदारनाथ सिंह कविता सम्मान’ (वर्ष 2026) के विजेताओं के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। सम्मान समिति के संयोजक प्रो. ए. अरविंदाक्षन द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस वर्ष हिंदी भाषा के अंतर्गत यह सम्मान युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश को तथा भारतीय भाषाओं की श्रेणी में यह सम्मान कन्नड़ के कवि राजेंद्र प्रसाद को प्रदान करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया है।

हाल ही में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC), नई दिल्ली में सम्मान की निर्णायक समिति की बैठक हुई। निर्णायक मंडल में प्रख्यात लेखक एवं कवि उदय प्रकाश, वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती गगन गिल, विख्यात कन्नड़ नाटककार व कवि प्रो. एच. एस. शिवप्रकाश तथा जानी-मानी तमिल लेखिका सलमा शामिल थीं, जबकि समिति का संयोजन प्रो. ए. अरविंदाक्षन ने किया।

यह जानकारी साखी के संपादक सदानन्द शाही ने दी।

निर्णायक मंडल ने दोनों भाषाओं के रचनाकारों के अवदान को रेखांकित करते हुए अपनी संस्तुति में निम्नलिखित महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ दर्ज की हैं-

हिंदी कविता सम्मान: अदनान कफ़ील दरवेश

निर्णायक समिति के समक्ष समकालीन दौर में सक्रिय हिंदी के 12 युवा कवियों की कृतियाँ विचारार्थ रखी गई थीं। सभी कृतियों के गहन अवलोकन और मूल्यांकन के उपरांत युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश की कविताओं को केदारनाथ सिंह कविता सम्मान के योग्य पाया गया।

निर्णायक मंडल की दृष्टि में:”अदनान कफ़ील दरवेश की कविताएँ इस कठिन समय में एक भारतीय नागरिक के आंतरिक जीवन का झरोखा बनकर हम सब की भारतीयता की समझ का विस्तार करती हैं। इन कविताओं का पात्र कोई पराया नहीं, हम सबका चिर-परिचित कोई दोस्त और पड़ोसी है। यहाँ भाईचारे की गंध है, बदलते सामाजिक परिवेश से उपजी ख़ामोशी है, और वह मूक व्यथा है जो अब आमने-सामने नहीं कही जा सकती—जो सिर्फ़ कविता की कराह में उभरती है। ये कविताएँ पाठक को ठिठक कर सोचने पर विवश करती हैं और अनजाने ही हमारी सामूहिक करुणा का विस्तार करती चलती हैं। शिल्प का नयापन और कहन की मार्मिकता इन्हें समकालीन युवा कविता में बेजोड़ बनाती है।”

भारतीय भाषा सम्मान (कन्नड़): राजेंद्र प्रसाद

भारतीय भाषाओं की श्रेणी के अंतर्गत इस वर्ष कन्नड़ कविता के सशक्त हस्ताक्षर राजेंद्र प्रसाद को चुना गया है। वाणिज्य (Commerce) की औपचारिक शिक्षा और गैस सिलेंडर वितरण जैसे गैर-काव्यात्मक व श्रमसाध्य पेशे से जुड़े होने के बावजूद राजेंद्र प्रसाद समकालीन कन्नड़ साहित्य के एक अप्रतिम रचनाकार बनकर उभरे हैं। वे ‘संकथन’ (Sankathana) पत्रिका के संपादन-प्रकाशन के साथ शास्त्रीय संगीत, दृश्य कला, पाक कला, कृषि और प्रगतिशील सामाजिक सरोकारों से निरंतर जुड़े रहे हैं।

 निर्णायक मंडल की दृष्टि में :  “राजेंद्र प्रसाद ने समकालीन कन्नड़ कविता के उस इकहरेपन और सतही प्रगतिवाद को तोड़ा है, जो प्रायः वास्तविक काव्यानुभूति से दूर हो जाता है। उनकी कविताएँ मात्रा और गुणवत्ता—दोनों स्तरों पर अत्यंत समृद्ध हैं, जिनमें प्रेम, प्रतिरोध, सामाजिक आलोचना, पर्यावरण और गहरा आध्यात्मिक बोध एक साथ उपस्थित हैं। वे प्राचीन और मध्यकालीन भाषा-ऊर्जा को आधुनिक मुहावरे से जोड़ते हैं। विशेष रूप से करुणा के बुद्ध ‘अवलोकितेश्वर’ को संबोधित उनके ‘वचन’ आज के समय में विश्व को सर्वाधिक आवश्यक आध्यात्मिक व मानवीय स्पर्श प्रदान करते हैं।”

विशेष अनुशंसा एवं सम्मान समारोह
निर्णायक समिति ने संस्तुति की है कि सम्मान समारोह के अवसर पर कन्नड़ रचनाकार राजेंद्र प्रसाद की चुनिंदा कविताओं का हिंदी अनुवाद एक पुस्तिका/पुस्तक के रूप में प्रकाशित कराया जाए, ताकि हिंदी समाज कन्नड़ के इस विशिष्ट बौद्ध व मानवीय स्वर से सघनता से परिचित हो सके।

समारोह व काव्य-पाठ: यह प्रतिष्ठित सम्मान कवि केदारनाथ सिंह के जन्मदिन के अवसर पर आगामी 19 नवम्बर को नई दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह में प्रदान किया जाएगा। दोनों कवियों को ₹ 25000-25000 की राशि तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा । इस विशेष अवसर पर हिंदी और कन्नड़ दोनों भाषाओं के सम्मानित कवियों का काव्य-पाठ भी आयोजित होगा।