सात सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं मानवाधिकार सहयोगियों को ‘जनमित्र अवार्ड–2026’ से किया गया सम्मानित
वाराणसी। मानवाधिकार जन निगरानी समिति / पीपुल्स विजिलेंस कमेटी ऑन ह्यूमन राइट्स (PVCHR) और जन मित्र न्यास (JMN) द्वारा IRCT एवं UNVFVT के सहयोग से 11 अगस्त को पराड़कर स्मृति भवन, मैदागिन, वाराणसी में ‘सर्वाइवर एलायंस मीटिंग–2026’ का आयोजन किया गया। इस वर्ष की बैठक का केंद्रीय विषय “परिवर्तन का नेतृत्व करते सर्वाइवर: पुनर्वास, गरिमा और न्याय” रहा।
कार्यक्रम में मानवाधिकार उल्लंघन, यातना, हिंसा, सामाजिक भेदभाव एवं अन्य प्रकार के उत्पीड़न से प्रभावित सर्वाइवरों के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार रक्षकों एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उदय प्रताप कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष डॉ. परमेन्द्र सिंह ने छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए लोहिया जी की याद दिलाई और लोकतंत्र में जमीनी आंदोलन के महत्व पर बल दिया। वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत ने सुशील त्रिपाठी के निधन की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए घसिया बस्ती से ही रहे पलायन और आजीविका के संकट की कहानी सुनाई। उन्होंने घसिया बस्ती में हो रहे पुलिस उत्पीड़न के कई प्रसंग सुनाये।

डॉक्टर लेनिन रघुवंशी ने इस संदर्भ में 1860 के दशक में पुलिस कानून के निर्माण और अभी तक जारी पुलिस की संस्कृति की आलोचना करते हुए पुलिस कमीशन की सिफारिशों को लागू करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि जिस अमानवीय ढंग से पुलिस कर्मियों को नौकरी करनी पड़ती है, उसको भी सम्बोधित किए जाने की जरूरत है।
कार्यक्रम में बंदियों के अधिकारों पर काम करने वाले बिहार से आये संतोष उपाध्याय ने अनूप चौधरी और सुशील त्रिपाठी की विरासत को याद किया। बंकट दस्तकार अधिकार मंच के मोहम्मा इदरीस ने बुनकरों की समस्याओं को उठाया और बीते तीन महीने से बिजली की दरों पर सरकार के साथ चल रही तकरार और पत्राचार के बारे में बताया।
वरिष्ठ पत्रकार एके लारी और अजय राय ने सुशील त्रिपाठी के काम और उसके महत्व पर विस्तार से बात की। श्रुति नागवंशी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय की अवधारणा को केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए उसमें गरिमा, पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापना और भेदभाव से मुक्ति को भी शामिल किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में मानवाधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले श्री अनिल चौधरी के संदेश “ पहचान नहीं, मानवीय गरिमा” को कार्यक्रम की मूल भावना से जोड़ते हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली से आये वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके साथ हुए अन्याय अथवा उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी मानवीय गरिमा से होनी चाहिए।
इसी क्रम में स्वर्गीय श्री सुशील त्रिपाठी के सामाजिक एवं मानवाधिकार क्षेत्र में दिए गए योगदान को भी स्मरण किया गया। उपस्थित लोगों ने उनके कार्यों और विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम में सामाजिक सरोकारों, मानवाधिकारों एवं जनहित के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आनंद प्रकाश निषाद, नितिन गुप्ता, राकेश रंजन त्रिपाठी, राजेन्द्र प्रसाद, पुष्पा पाल, अशोक कुमार सिन्हा, इफ्तेखार अहमद को ‘ जनमित्र अवार्ड–2026’ से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में बघवानाला राजा सुहेल देव जनमित्र शिक्षण केंद्र (मुशी यूथ पंचायत) की छात्राओं द्वारा मानवाधिकार एवं सामाजिक जागरूकता पर आधारित प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि प्रत्येक सर्वाइवर को न्याय, सम्मान, पुनर्वास और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार सुनिश्चित कराने के लिए सामूहिक प्रयासों को और मजबूत किया जाएगा।
