गोरखपुर। प्रेमचन्द साहित्य संस्थान और साखी पत्रिका द्वारा हिन्दी आलोचना, कविता एवं गद्य के मूर्धन्य हस्ताक्षर डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव की स्मृति और उनके साहित्यिक अवदान पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘परमानन्द श्रीवास्तव : महत्व और अवदान’ का आयोजन 19-20 सितम्बर 2026 को गोरखपुर में किया जा रहा है। राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के जाने माने साहित्यकार भाग लेंगे।
यह जानकारी प्रेमचंद साहित्य संस्थान के निदेशक प्रो सदानंद शाही ने आज गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि डॉ परमानन्द जी के साथ गोरखपुर के साहित्य प्रेमियों और आप सभी आत्मीय जनों के अत्यंत गहरे, अंतरंग और प्रगाढ़ सम्बन्ध रहे हैं। उन्होंने गोरखपुर की साहित्यिक धरा को जो ऊर्जा और पहचान दी, उसे अक्षुण्ण रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बाँसगाँव में जन्मे परमानन्द श्रीवास्तव ने तत्कालीन आगरा विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम. ए. की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अध्यापन कार्य को अपने जीवन यापन का साधन बनाया। गोरखपुर के सेण्ट एण्ड्रूज कालेज में अध्यापन कार्य प्रारम्भ किया। बाद में उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग में आचार्य पद को सुशोभित किया।
लेखक के रूप में डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव ने हिन्दी साहित्य के कई क्षेत्रों को अपना योगदान दिया। कविता से अपने लेखन का प्रारम्भ करने के बाद उन्होंने कहानियाँ, डायरी इत्यादि जैसी विधाओं में भी उन्होंने कलम चलायी। मगर उन्हें सर्वाधिक ख्याति हिन्दी आलोचना के क्षेत्र में मिली। कविता के क्षेत्र में ‘ उजली हँसी के छोर पर ‘, ‘ अगली शताब्दी के बारे में ‘, ‘ एक अनायक का वृत्तांत ‘ जैसी कृतियाँ उनकी काव्य सर्जना का उदाहरण हैं। उन्होंने ‘ रुका हुआ समय ‘, ‘ नींद में मृत्यु ‘, ‘ इस बार सपने में और अन्य कहानियाँ ‘ भी हिन्दी साहित्य को दिये। आलोचना जगत में उनकी प्रमुख कृतियाँ नई कहानी का परिप्रेक्ष्य, हिन्दी कहानी की रचना प्रक्रिया, कवि कर्म और काव्यभाषा, कविता का अर्थांत, कविता का उत्तरजीवन, समकालीन कविता का यथार्थ, उपन्यास का यथार्थ, पुनर्जन्म, आदि विशेष रूप से चर्चित रहीं। डायरी
लेखक के रूप में उनकी कृति ‘ एक विस्थापित की डायरी ‘ चर्चित रही।
उन्होंने आलोचना पत्रिका का संपादन किया। साखी पत्रिका और प्रेमचन्द साहित्य संस्थान से वे लगातार जुड़े रहे। अपने साहित्य योगदान के लिए उन्हें बहुत से सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त हुए जिनमें व्यास सम्मान, भारत भारती सम्मान और रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार प्रमुख हैं।
प्रो शाही ने बताया कि संगोष्ठी में भाग लेने के लिए प्रो शम्भूनाथ (कोलकाता), प्रो अरुण कमल (पटना), प्रो दुर्गा प्रसाद गुप्त (दिल्ली), प्रो प्रणय कृष्ण (प्रयागराज), प्रो अनामिका (दिल्ली), सुश्री अलका सरावगी (कोलकाता), डा निशांत (आसनसोल), अष्टभुजा शुक्ल (बस्ती), स्वप्निल श्रीवास्तव, प्रो रघुवंश मणि व डॉ विशाल श्रीवास्तव (फैजाबाद), अखिलेश (लखनऊ), जितेन्द्र श्रीवास्तव ( दिल्ली), रबीन्द्रनाथ श्रीवास्तव परिचय दास, ए अरविदाक्षन सहित कई विद्वानों को आमंत्रित किया गया है।
