साहित्य - संस्कृति

आलोचक एवं कवि रघुवंश मणि को पहला ‘ परमानन्द श्रीवास्तव आलोचना सम्मान ’

19–20 सितम्बर को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में दिया जाएगा सम्मान

गोरखपुर / वाराणसी।  हिन्दी साहित्य के जाने माने आलोचक एवं कवि डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव की स्मृति में स्थापित पहला ‘परमानन्द श्रीवास्तव आलोचना सम्मान’ सुप्रसिद्ध आलोचक, कवि एवं अनुवादक रघुवंश मणि को प्रदान किया जाएगा।

यह जानकारी परमानन्द श्रीवास्तव स्मृति न्यास की मुख्य न्यासी डॉ.  अन्विता श्रीवास्तव ने दी।

यह सम्मान परमानन्द श्रीवास्तव स्मृति न्यास एवं साखी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘परमानन्द श्रीवास्तव: अवदान और महत्व’ (19–20 सितम्बर) के उद्घाटन सत्र में प्रदान किया जाएगा। रघुवंश मणि को यह सम्मान डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव की धर्मपत्नी ज्ञानवती श्रीवास्तव एवं प्रख्यात आलोचक शम्भुनाथ द्वारा अर्पित किया जाएगा। सम्मान स्वरूप ₹11,000 की धनराशि और प्रशस्ति-पत्र भेंट किया जाएगा।

इस सम्मान के लिए वरिष्ठ कवि स्वप्निल श्रीवास्तव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय चयन समिति गठित की गई थी, जिसमें डॉ.  अनामिका और प्रो. सदानंद शाही शामिल थे।

चयन समिति ने रघुवंश मणि के आलोचनात्मक अवदान को रेखांकित करते हुए अपनी संस्तुति में कहा कि  ” 3 जून 1964 को लखनऊ में जन्मे और फैजाबाद (अयोध्या) निवासी रघुवंशमणि ने डब्ल्यू. बी. यीट्स पर अपना शोध कार्य सम्पन्न किया। वे शिवहर्ष किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय में लम्बे समय तक अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर रहे हैं। हिन्दी और अंग्रेज़ी—दोनों भाषाओं पर उनका समान अधिकार है, जिसका रचनात्मक उपयोग वे अपने आलोचना-कर्म में निरंतर करते रहे हैं। उनके लिए भाषा और विचार किसी भौगोलिक सीमा में आबद्ध नहीं हैं; वे एक सच्चे अर्थों में वैश्विक नागरिक और लेखक हैं।

 विगत तीन दशकों से आलोचना के क्षेत्र में सक्रिय रघुवंश मणि के लिए समकालीन कविता विशेष अनुराग का विषय रही है। वे विचारों से जनपक्षधर हैं और सत्ता के पक्ष में नहीं, बल्कि विपक्ष में खड़े होकर निर्भीक लेखन करते हैं—जो किसी भी सच्चे लेखक की पहली और अनिवार्य शर्त है। वे कृतिकार के बजाय कृति को केंद्र में रखकर मूल्यांकन करते हैं, जिससे उनकी आलोचना किसी भी तरह के संदेह से परे और अत्यंत विश्वसनीय बनती है।

आलोचना के साथ-साथ उन्होंने वैश्विक वैचारिकी को हिन्दी जगत में सुलभ कराने का महती कार्य किया है। उन्होंने थियोडोर एडोर्नो, जुर्गन हेबरमास, फ्रेडरिक जेमसन, मिशेल फूको और एडवर्ड सईद जैसे विश्वविख्यात विचारकों के लेखों का प्रामाणिक अनुवाद किया है। कविता और आलोचना के इस दोहरे दायित्व का वे अत्यंत निष्ठा और गंभीरता से निर्वाह कर रहे हैं।”

रघुवंश मणि की प्रमुख कृतियाँ :

 निर्वचन (आलोचना)
 समय में हस्तक्षेप (वैश्विक विचारकों के लेखों का अनुवाद)
 हरा रंग केन्द्रीय रंग नहीं है (कविता संग्रह)
हवा के पखेरू (कविता संग्रह — शीघ्र प्रकाश्य)

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