बहराइच. प्रवासी मजदूरों को पुनर्स्थापित करने के लिए उन्हें केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से स्वैच्छिक संस्था-डेवलपमेंटल एसोसिएशन फार ह्यूमन एडवांसमेंट (देहात) की “कोरोना रोधी एवं प्रवासी मजदूर सहायता रथ” ने अब तक 103 गांवों की यात्रा पूरी कर ली है।
यह यात्रा एक जून से शुरू हुई थी. इस रथ को बहराइच के सांसद अक्षयवर लाल गोंड एवं सदर विधायक अनुपमा जायसवाल द्वारा ने बहराइच जिला मुख्यालय से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
अपनी यात्रा के दौरान यह रथ मुख्यत: 532 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए बहराइच के भारत-नेपाल सीमावर्ती मिहींपुरवा व नवाबगंज विकास खंडों के 103 गांवों से गुजरा।
कोरोना रोधी रथ के प्रमुख संयोजक दिव्यांशु चतुर्वेदी ने बताया कि इस दौरान 112 बैठकों के माध्यम से 1792 प्रवासी मजदूरों के साथ उन्नत शील कृषि आधारित आजीविका, खाद्य प्रसंस्करण, लघु एवं कुटीर उद्योग, स्वरोजगार, कौशल विकास, मनरेगा कानून एवं काम का अधिकार आदि मुद्दों पर शैक्षणिक सत्र आयोजित किए गए। साथ ही कोरोना के बचाव पहलुओं पर आधारित अवधी भाषा के जिंगल गीतों एवं संभाषणों के माध्यम से 9658 ग्रामीणों को जागरूक किया गया।

जागरूकता के मुख्य विषयों में कोरोना वायरस की संरचना व संहार का सैनीटाईजेशन और साबुन द्वारा हाथ धुलाई से संबंध, शारीरिक दूरी का कोरोनावायरस प्रसार से संबंध एवं रोकने के उपायों पर गहन जागरूकता का प्रसार हुआ।
अपनी यात्रा के दौरान यह रथ मिहींपुरवा व नवाबगंज विकास खंडों के बिछिया बाजार, टेढिया नयी बस्ती, कैलाशनगर, सिरसियनपुरवा, बढ़ईनपुरवा, भेडहनपुरवा, मंगलपुरवा, कारीकोट, लोहरा, जमुनिहा, राजाराम टांडा, नरायनटांडा, विशुनटांडा, गुलरा, सीताराम पुरवा, बाजपुर बनकटी, फकीरपुरी, रमपुरवा, बर्दिया, विशुनापुर, रूपैडीहा, गोकुलपुर, पंडित पुरवा, बख्शीगांव, पोखरा, मिहींपुरवा आदि गांवों से गुजरा और संवाद स्थापित किया।
मिहींपुरवा व नवाबगंज में जनपद के अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक प्रवासी मज़दूरों की वापसी हुई है।
देहात संस्था के मुख्य कार्यकारी डा0 जितेन्द्र ने बताया कि अब समाज को कोविड-19 के साथ ही जीना होगा और इसके लिए जरूरी है कि इसके सभी पहलुओं पर समाज को जागरूक किया जाए। यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा।
इस दौरान देहात संस्था के कार्यकर्ता गीताप्रसाद, रमाकांत पासवान, विजय यादव, सरिता, देवेश अवस्थी, पवन यादव आदि की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
