गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों के संगठन गुआक्टा (GUACTA) ने 17 अगस्त को सत्याग्रह मार्च का आयोजन किया गया। यह सत्याग्रह मार्च प्रशासनिक भवन से होते हुए मंडल आयुक्त कार्यालय तक गया । वहां पर अपनी आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन देकर पुनः प्रशासनिक भवन पैदल मार्च करते हुए सभी शिक्षक वापस आए।
गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर जनपदों के 21 वित्तपोषित महाविद्यालयों से आए लगभग छह सौ से अधिक शिक्षक इस मार्च में शामिल हुए और शिक्षक हितों तथा विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
यह सत्याग्रह मार्च गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन के समक्ष शिक्षकों द्वारा पूर्व में रखी गई आठ सूत्री मांगों पर अपेक्षित सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने के विरोध में आयोजित की गई थी। शिक्षकों का आरोप है कि उनकी न्यायोचित मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है तथा विश्वविद्यालय स्तर पर उनके साथ संवेदनशील एवं सकारात्मक व्यवहार नहीं किया जा रहा है। शिक्षकों ने कहा कि लंबे समय से अपनी समस्याओं और अधिकारों को लेकर वे लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते रहे हैं, लेकिन अपेक्षित समाधान न होने के कारण उन्हें सत्याग्रह का रास्ता अपनाना पड़ा।
सत्याग्रह मार्च में शामिल शिक्षकों ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, शिक्षक सम्मान और विद्यार्थियों के हितों की लड़ाई है। शिक्षकों का कहना था कि जिन शिक्षकों के माध्यम से महाविद्यालयों में हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जाती है, यदि उन्हीं शिक्षकों को उनके वैधानिक एवं न्यायोचित अधिकारों से वंचित किया जाएगा तथा विभिन्न प्रकार से प्रताड़ित किया जाएगा, तो इसका सीधा प्रभाव उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा।
शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षकों को उनके अधिकार और सुविधाएं देने के बजाय विभिन्न स्तरों पर उन्हें मानसिक एवं प्रशासनिक रूप से परेशान करने की कोशिश की जा रही है। शिक्षकों का कहना था कि शिक्षक सम्मान और अधिकारों के साथ काम करना चाहते हैं, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव और समस्याओं के कारण शिक्षक समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है।

पैदल मार्च में विद्यार्थियों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। शिक्षकों का कहना था कि पूर्वांचल के गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर सहित आसपास के पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए महाविद्यालयों में आते हैं। इनमें अधिकांश विद्यार्थी सामान्य एवं सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवारों से आते हैं। ऐसे विद्यार्थियों पर विभिन्न प्रकार के शुल्कों का अतिरिक्त भार डालना उनके लिए आर्थिक कठिनाइयां पैदा करता है। शिक्षकों ने कहा कि उच्च शिक्षा को सुगम और सुलभ बनाने के बजाय यदि विद्यार्थियों पर लगातार नए शुल्कों का बोझ डाला जाएगा, तो इसका सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों पर पड़ेगा और इससे सकल नामांकन अनुपात प्रभावित होगा।
शिक्षकों ने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब शिक्षक अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता है और विद्यार्थी आर्थिक एवं शैक्षणिक समस्याओं से जूझता है, तो दोनों की पीड़ा एक-दूसरे से अलग नहीं है। इसी भावना को लेकर आज बड़ी संख्या में शिक्षक एकजुट होकर सत्याग्रह मार्च में शामिल हुए।
गुआक्टा के प्रतिनिधियों ने कहा कि आठ सूत्री मांगों पर सकारात्मक एवं सम्मानजनक ढंग से विचार कर उनका समाधान किया जाना चाहिए। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद स्थापित करने तथा शिक्षक एवं छात्र हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं किया गया तो शिक्षक समुदाय लोकतांत्रिक तरीके से अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए विवश होगा।
इस अवसर पर पूर्व गुआक्टा अध्यक्ष, डॉ. भगवान सिंह, डॉ. श्रीश मणि त्रिपाठी, प्रो. केडी तिवारी, अध्यक्ष प्रो. लोकेश त्रिपाठी, महामंत्री डॉ. निरंकार राम त्रिपाठी, संयुक्त मंत्री डॉ. प्रद्योत कुमार सिंह, उपाध्यक्ष रेनू कमल वंशी के साथ सभी सम्बद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएँ एवं अन्य संगठनों के पदाधिकारियों के साथ सदस्य उपस्थित रहे।
